ख़बरों की खबर, सीधे आप तक, सिर्फ सच के साथ

बजट 2021: नए बजट को लेकर उद्योगपतियों की क्या है राय

केंद्रीय वित्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने अपने भाषण में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (Agriculture Infrastructure and Development Cess) लगाने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि इस प्रावधान से साल में करीब 30,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। लेकिन इससे आम जनता पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा। यह खुलासा केंद्रीय वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने किया।

वाधवानी फाउंडेशन में वाधवानी ऑपरचुनिटी के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सुनील दहिया ने कहा, ‘बजट में अप्रेंटिसशिप ऐक्ट में प्रस्तावित संशोधन में हमारी शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था में नई जान फूंकने की संभावना है। इससे हमारे युवाओं के लिए अप्रेंटिसशिप के मौकों को और बेहतर करने की संभावना बनेगी। भारत के कामगारों को कौशल युक्त करने के लिए अप्रेंटिसशिप सर्वश्रेष्ठ मॉडल हो सकता है। यह छात्रों या युवकों को पूरी तरह प्रशिक्षत उद्योग का कार्यकारी बनने में सहायता करता है। ये ऐसे लोग होंगे जिन्हें कार्यस्थल पर काम करने का वास्तविक अनुभव होगा। इससे ना सिर्फ युवकों को नौकरी पर रखने की योग्यता बेहतर होगी बल्कि बेरोजगारी भी कम होगी पर नियोक्ता के नजरिए से देखें तो इससे युवकों का कौशल बेहतर होगा, उनकी उत्पादकता बढ़ेगी और वे पेशेवर होंगे।

वाधवानी फाउंडेशन में वाधवानी कैटेलिस्ट की वाइस प्रेसिडेंट रत्ना मेहता कहती है, ‘यह उम्मीद का बजट है और सकारात्मकता की छड़ी है। बेहद मुश्किल परिस्थितियों में यह एक महत्वपूर्ण बजट था। बजट से बहुत सारी उम्मीद बंधी हुई थी और इनमें प्रमुख कि यह अर्थव्यवस्था को वापस समान्य स्थिति में लाएगा। वित्त मंत्री से घाटे का प्रबंध करने और अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने का मुश्किल काम अपेक्षित था। लगता है कि उन्होंने सफलता पाई है और रोजगार बढ़ाने के लिए खर्चों में वृद्धि की है। इस तरह खपत में वृद्धि की उम्मीद है। यह एक बड़ा कदम है जो समय की आवश्यकता भी थी। हेल्थकेयर को भी सरकारी सहायता की जरूरत थी और यहां उन्होंने आवंटन में अच्छी-खासी वृद्धि की है। करों में छूट और डिजिटाइजेशन पर ध्यान दिए जाने से स्टार्ट अप को फायदा होगा खासकर हेल्थकेयर, संभारतंत्र, शिक्षा जिन्हें बढ़े हुए मौके मिलेंगे। कॉरपोरेट क्षेत्र को सेस और टैक्स में वृद्धि से बख्श दिया गया। इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का कार्म निर्बाध ढंग से हो पाएगा। संक्षेप में बजट सही काम करता लगता है। ऐसे में बुराई इसके विवरण या विस्तार तथा लागू करने में होगी।